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आज मैं पेड़ पर चढ़ी और सबको ऊपर से देख रही थी। बड़ी नीचे से बुला रहा था। | Mimi | |
मिमी मिमी नीचे आओ न खेल रहे हैं। मैंने कहा, बड़ी मैं ऊपर से देख रही हूँ। | Mimi | |
जूजू बोली मीमी मेरे साथ खेलो मामा विस्कर्ज ने देखा, | Mimi | |
मिमी मेरी प्यारी सावधान रहना, गिर, मत जाना पापा पौज हंसे। | Mimi | |
मिमी सबसे चालाक हैं। नैरेटर कहानी में मेरी हरकतें डाल रहे थे। | Mimi | |
मिस्टर नटी ने नट ऊपर फेंका, मैंने पकड़ लिया। टोटो नीचे भाव भाव कर रहा था। | Mimi | |
मिमी नीचे आओ। मिसिस चुडी मेरे पास आई। मिमी हम दोनो साथ उड़े। | Mimi | |
मैंने हाँ कहा हम सब साथ खेले बड़ी जूजू मामा विस्कर्ज पापा, | Mimi | |
पॉज नेरेटर मिस्टर नट्टी टोटो, मिस चिपी, | Mimi | |
मैंने सोचा ऊपर से देखने में सब कितने प्यारे लगते हैं। | Mimi | |
जानवरों में गड्ढा सबसे ज्यादा बुद्धिहीन समझा जाता है। | Mimi | |
हम जब किसी आदमी को पहले दर्जे का बेवकूफ कहना चाहते हैं तो उसे गधा कहते हैं। | Mimi | |
गधा सचमुच बेवकूफ है या उसके सीधे पन, उसकी निरापद सहिष्णुता ने उसे यह पदवी दे दी है, | Mimi | |
इसका निश्चय नहीं किया जा सकता। गायें सींग मारती हैं। | Mimi | |
ब्याही हुई गाय तो अनायास ही सिंहनी का रूप धारण कर लेती है। | Mimi | |
कुत्ता भी बहुत गरीब जानवर है, लेकिन कभी कभी उसे भी क्रोध आ ही जाता है। | Mimi | |
किन्तु गधे को कभी क्रोध करते नहीं सुना। | Mimi | |
न देखा, जितना चाहो, गरीब को मारो, चाहे, जैसी खराब, सड़ी हुई घास सामने डाल। | Mimi | |
2 उसके चेहरे पर कभी असंतोष की छाया भी नहीं दिखाई देगी। | Mimi | |
वैशाख में चाहे एकाध बार कुलेल कर लेता हो, पर हमने तो उसे कभी खुश होते नहीं देखा। | Mimi | |
उसके चेहरे पर। 1 विषाद स्थायी रूप से छाया रहता है। | Mimi | |
सुख दुःख, हानि, लाभ, किसी भी दशा में उसे बदलते नहीं देखा। | Mimi | |
रिश्यों मुनियों के जितने गुण हैं, वे सभी उसमें पराकाश ठा को पहुँच गए हैं। | Mimi | |
पर आदमी उसे बेवकूफ कहता है? सद्गुणों का इतना अनादर कहीं नहीं देखा? | Mimi | |
कदाचित सीधापन संसार के लिए उपयुक्त नहीं है? | Mimi | |
देखिए न, भारतवासियों की अफ्रीका में क्या दुर्दशा हो रही है? | Mimi | |
क्यों अमरीका में उन्हें घुसने नहीं दिया जाता? बेचारे शराब नहीं पीते। | Mimi | |
4 पैसे कुसमय के लिए बचाकर रखते हैं। | Mimi | |
जी तोड़ कर काम करते है, किसी से लड़ाई झगड़ा नहीं करते। | Mimi | |
4 बातें सुनकर गम खा जाते हैं, फिर भी बदनाम हैं। | Mimi | |
कहा जाता है वे जीवन के आदर्श को नीचा करते हैं। | Mimi | |
अगर वे ईट का जवाब पत्थर से देना सीख जाते तो शायद सब भी कहलाने लगते। | Mimi | |
जापान की मिसाल सामने है। 1 ही विजय ने उसे संसार की सभ्य जातियों में गण्य बना दिया। | Mimi | |
लेकिन गधे गधा है। और वह है बैल। | Mimi | |
जिस अर्थ में हम गधे का प्रयोग करते हैं, | Mimi | |
कुछ उसी से मिलते जुलते अर्थ में बछिया के ताऊ का भी प्रयोग करते है। | Mimi | |
कुछ लोग बैल को शायद बेवकूफी में सर्वश्रेष्ठ कहेंगे मगर? हमारा विचार ऐसा नहीं है। | Mimi | |
बैल कभी कभी मारता भी है, कभी कभी अरियल बैल भी देखने में आता है, | Mimi | |
और भी कई रीतियों से अपना असंतोष प्रकट कर देता है। अतएव उसका स्थान गधे से नीचा है। | Mimi | |
झूरी काछी के दोनो बैलों के नाम थे हीरा और मोती दोनों पछाई जाति के थे। | Mimi | |
देखने में सुन्दर, काम में चौकस, डील में ऊँचे, दोनों में भाईचारा हो गया था। | Mimi | |
1 दुसरे के मन की बात को कैसे समझा जाता है, हम कह नहीं सकते। | Mimi | |
अवश्य ही उनमें कोई ऐसी गुप्त शक्ति थी, | Mimi | |
जिससे जीवों में श्रेष्ठता का दावा करने वाला मनुष्य वंचित है। अपना प्रेम प्रकट करते। | Mimi | |
कभी कभी दोनों सींग भी मिला लिया करते थे, विग्रह के नाते से नहीं, केवल विनोद के भाव से, | Mimi | |
आत्मीयता के भाव से। जैसे दोनों में घनिष्ठता होते ही धौल धब्बा होने लगता है। | Mimi | |
इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफसी, कुछ हल्की सी रहती है, जिस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया जा सकता। | Mimi | |
जिस वक्त ये दोनों बैल हल या गाड़ी में जोत दिए जाते और गर्दन हिला हिला कर चलते, | Mimi | |
उस वक्त हर 1 की यही चेष्टा होती थी कि ज्यादा से ज्यादा बोझ मेरी ही गर्दन पर रहे। | Mimi | |
नांद में खली भूसा पर जाने के बाद दोनों साथ उठते, | Mimi | |
साथ नांद में मुँह डालते और साथ ही बैठते थे। | Mimi | |
1 मुँह हटा लेता तो दूसरा भी हटा लेता था। | Mimi | |
संयोग की बात झूरी ने 1 बार गोई को ससुराल भेज दिया। बैलों को क्या मालूम? | Mimi | |
वे क्यों भेजे जा रहे हैं? समझे मालिक ने हमें बेच दिया। | Mimi | |
अपना यों बेचा जाना, उन्हें अच्छा लगा या बुरा, कौन जाने कठिन? | Mimi | |
परिश्रम के वर्णन में पर झूरी के साले गया को घर तक गोईं ले जाने में दांतों पसीना आ गया। | Mimi | |
संघर्ष पूर्ण गति में पीछे से हाँकता तो दोनों दाये बाये भागते। | Mimi | |
बघिया पकड़ कर आगे से खींचता तो दोनों पीछे की ओर जोर लगाते। | Mimi | |
प्रतिरोध में मारता तो दोनों सींगे नीची करके हुंकारते। | Mimi | |
अगर ईश्वर ने उन्हें वाणी दी होती, तो झूरी से पूछते, तुम हम गरीबों को क्यों निकाल रहे हो? | Mimi | |
हमने तो तुम्हारी सेवा करने में कोई कसर नहीं उठा रखी। | Mimi | |
अगर इतनी मेहनत से काम न चलता था, तो और काम ले लेते। | Mimi | |
हमें तो तुम्हारी चाकरी में मर जाना कबूल था। हमने कभी दाने चारे की शिकायत नहीं की। | Mimi | |
तुमने जो कुछ खिलाया, वह सिर झुकाकर खा लिया। फिर तुमने हमें इस जालिम के हाथ क्यों बेच दिया? | Mimi | |
संध्या समय दोनों बैल अपने नए स्थान पर पहुँचे। | Mimi | |
दिन भर के भूखे थे, लेकिन जब नांद में लगाए गए, तो 1 ने भी उसमें मुंह नहीं डाला। | Mimi | |
दिल भारी हो रहा था। जिसे उन्होंने अपना घर समझ रखा था, वो आज उनसे छूट गया। | Mimi | |
यह नया घर, नया गांव, नए आदमी उन्हें बेगानों से लगते थे। | Mimi | |
दोनों ने अपनी मूक भाषा में सलाह की। 1 दूसरे को कनखियों से देखा और लेट गए। | Mimi | |
बहुत मजबूत थे। अनुमान न हो सकता था कि कोई बैल उन्हें तोड़ सकेगा। | Mimi | |
पर इन दोनों में इस समय दूनी शक्ति आ गयी थी। 11 झटके में रस्सियाँ टूट गयी। | Mimi | |
झूरी प्रातः काल सो कर उठा तो देखा कि दोनों बैल चरनी पर खड़े हैं। | Mimi | |
दोनों की गर्दनों में आधा आधा गरांव लटक रहा था। | Mimi | |
घुटने तक पांव कीचड़ से भरे हैं और दोनों की आँखों में विद्रोह में स्नेह झलक रहा है। | Mimi | |
झूरी बैलों को देखकर स्नेह से गदगद हो गया। दौड़कर उन्हें गले लगा लिया। | Mimi | |
वो दृश्य बड़ा ही मनोहर था। | Mimi | |
घर और गाँव के लड़के जमा हो गए और तालियां बजा बजा कर उनका स्वागत करने लगे। | Mimi | |
गाँव के इतिहास में यह घटना अभूतपूर्व न होने पर भी महत्वपूर्ण थी। | Mimi | |
बाल सभा ने निश्चय किया, दोनों पशु वीरों का अभिनन्दन पत्र देना चाहिए। | Mimi | |
कोई अपने घर से रोटियाँ लाया, कोई गुड़, कोई चोकर, कोई भूसी। | Mimi | |
1 बालक ने कहा, ऐसे बैल किसी के पास न होंगे। दूसरे ने समर्थन किया। | Mimi | |
इतनी दूर से दोनों अकेले चले आये। | Mimi | |
तीसरा बोला बैल नहीं है, वे उस जन्म के आदमी है, | Mimi | |
इसका प्रतिवाद करने का किसी को साहस नहीं हुआ। | Mimi | |
झूरी की स्त्री ने बैलों को द्वार पर देखा तो जल उठी। | Mimi | |
बोली कैसे नमक हराम बैल हैं कि 1 दिन वहाँ काम न किया। भाग खड़े हुए। | Mimi | |
झूरी अपने बैलों पर यह आक्षेप न सुन सका, नमक हराम क्यों है, चारा दाना न दिया होगा, | Mimi | |
तो क्या करते? स्त्री ने रोब के साथ कहा, बस, तुम ही तो बैलों को खिलाना जानते हो। | Mimi | |
और तो सभी पानी पिला पिला कर रखते हैं। | Mimi | |
झूरी ने चुराया चारा मिलता तो क्यों भागते स्त्री चिड़ी भागे। | Mimi | |
इसलिए कि वे लोग तुम जैसे बुद्धुओं की तरह बैलों को सहलाते नहीं खिलाते हैं, तो रगड़ कर, | Mimi | |
जोतते भी हैं, ये दोनों ठहरे कामचोर भाग निकले। | Mimi | |
अब देखूँ, कहाँ से खली और चोकर मिलता है। सूखे भूसे के सिवा कुछ न दूंगी। | Mimi | |
खाएं चाहें मरें। वही हिड़ाम वही हुआ। | Mimi | |
मजूर की बड़ी ताकीद की गई की बैलों को खाली सूखा भूसा दिया जाए। | Mimi | |
बैलों ने नाद में मुँह डाला तो फीका फीका, न कोई चिकनाहट, न कोई रस। | Mimi | |
क्या खाएं आशा भरी आँखों से द्वार की ओर ताकने लगे। | Mimi | |
झूरी ने मजूर से कहा, थोड़ी सी खली क्यों नहीं डाल देता? | Mimi | |
बे मालकिन, मुझे मालकिन, मुझे मार ही डालेगी। चुरा कर डाला। | Mimi | |
न दादा पीछे से तुम भी उन्हीं की सी कहोगे। | Mimi |
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